(N/A) सरल आवर्त गति $(SHM)$ को एक रेखीय पथ पर एक निश्चित बिंदु के चारों ओर होने वाली आवर्ती गति के रूप में परिभाषित किया जाता है,जहाँ वस्तु पर कार्य करने वाला प्रत्यानयन बल (restoring force) हमेशा निश्चित बिंदु (माध्य स्थिति) की ओर निर्देशित होता है और माध्य स्थिति से वस्तु के विस्थापन के सीधे आनुपातिक होता है।
गणितीय रूप से,इसे $F = -kx$ के रूप में व्यक्त किया जाता है,जहाँ $F$ प्रत्यानयन बल है,$x$ माध्य स्थिति से विस्थापन है,और $k$ बल नियतांक है।
$SHM$ के महत्वपूर्ण लक्षण:
$1$. यह गति आवर्ती और दोलनी होती है।
$2$. प्रत्यानयन बल हमेशा माध्य स्थिति की ओर निर्देशित होता है।
$3$. प्रत्यानयन बल का परिमाण माध्य स्थिति से विस्थापन के सीधे आनुपातिक होता है $(F \propto x)$।
$4$. कण का त्वरण भी विस्थापन के आनुपातिक होता है और माध्य स्थिति की ओर निर्देशित होता है $(a = -\omega^2 x)$।
$5$. सरल आवर्त गति करने वाली वस्तु को सरल आवर्त दोलक (Simple Harmonic Oscillator) कहा जाता है।